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Hindu (हिन्दू)

Hindu (हिन्दू)

No customer reviews yet ISBN 9788169102780

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'हिन्दू' उनके काव्य-सफर की एक अत्यंत प्रभावशाली और वैचारिक कृति है। 'भारत-भारती' के बाद यह उनकी दूसरी ऐसी बड़ी रचना थी जिसने समाज में सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।
- सांस्कृतिक गौरव का गानः इस पुस्तक में गुप्त जी ने हिन्दू धर्म और संस्कृति के उदात्त स्वरूप को प्रस्तुत किया है। उन्होंने वेदों, उपनिषदों और प्राचीन ऋषियों के ज्ञान को आधार बनाकर यह बताया है कि हिन्दू संस्कृति विश्व के लिए कितनी कल्याणकारी रही है।
- समाज सुधार का आह्वानः गुप्त जी केवल प्रशंसा तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों, छुआछूत, ऊंच-नीच और आपसी फूट की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक हम स्वयं को भीतर से नहीं सुधारेंगे, तब तक राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं है।
- सांप्रदायिक नहीं, उदार दृष्टिकोणः इस रचना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें 'हिन्दू' शब्द को संकीर्णता के बजाय एक व्यापक और उदार जीवन-दर्शन के रूप में पेश किया गया है। गुप्त जी का 'हिन्दू' वह है जो न्याय, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले।
- राष्ट्रीयता का स्वरः गुप्त जी का मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित कर उसे स्वतंत्रता संग्राम के लिए तैयार करना था। उन्होंने प्राचीन शौर्य की याद दिलाकर युवाओं के भीतर आत्मविश्वास भरने का प्रयास किया।
मैथिलीशरण गुप्त की 'हिन्दू' एक ऐसी कालजयी रचना है जो आज भी हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने की प्रेरणा देती है। यह केवल एक समुदाय की पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता को पहचानने की एक पुकार है।

About the author

Product details

Pub dateMar 30, 2026
ISBN-108169102782
ISBN-139788169102780
LanguageEnglish
Last updated 2026-07-26 02:27
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